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आईएस क्या है और कैसे आईएस की तैयारी करे (2017-2018)

आईएस क्या है और कैसे आईएस की तैयारी करे (2017-2018)
(What is IAS and how to prepare for IAS (2017-2018)
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सिविल सेवा व सिविल सेवा परीक्षा


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ऐतिहासिक पृष्टभूमि: भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रवादियों ने जो राजनीतिक आन्दोलन चलाया उसकी एक प्रमुख मांग थी कि लोक सेवा आयोग में भर्ती भारत में हो, क्योंकि तब इसकी परीक्षा इंग्लैंड में हुआ करती थी। प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना अक्तूबर 1926 को हुई। आज़ादी के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत 26 अक्तूबर 1950 को लोक आयोग की स्थापना हुई। इसे संवैधानिक दर्जा देने के साथ साथ स्वायत्ता भी प्रदान की गयी ताकि यह बिना किसी दबाव के योग्य अधिकारियों की भर्ती क़र सके। इस नव स्थापित लोक सेवा आयोग को संघ लोक सेवा आयोग नाम दिया गया।

संवैधानिक प्रावधान: यह एक संवैधानिक संस्था है क्योकि इसकी स्थापना संविधान के अनुछेद 315 के अंतर्गत हुई है। सामान्यता आयोग में अध्यक्ष सहित 9 से 11 सदस्य होते है, संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवको की भर्ती के लिए मुख्य संस्था है जो केन्द्र एवं केन्द्र शासित प्रदेशो में विभिन्न प्रशासनिक परीक्षाओं का आयोजन करता है।

आयोग विभिन्न सेवाओ के लिए लगभग दर्जन भर परीक्षाओ का आयोजन करता है, जैसे अभियांत्रिकी, चिकित्सा, वन सेवा आदि।
  1. भारतीय अभियांत्रिकी सेवा
  2. भारतीय आर्थिक और सांख्यिकी सेवा
  3. भूगर्भ सेवा
  4. विशिष्ट श्रेणी रेलवे प्रशिक्षु सेवा
  5. संयुक्त चिकित्सा सेवा
  6. केंद्रीय पुलिस सेवा
  7. संयुक्त रक्षा सेवा .
  8. राष्टीय रक्षा सेवा
वर्तमान में संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षाओ के माध्यम से 24 सेवाओ के लिए अभ्यर्थियों का चुनाव करता है इसमें से सबसे चर्चित भारतीय प्रशासिनिक, भारतीय पुलिस सेवा व भारतीय राजस्व सेवा हैं।
अखिल भारतीय सेवा : भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा एवं भारतीय वन सेवायें ही अखिल भारतीय सेवा कही जाती है। जबकि, अन्य जैसे - भारतीय राजस्व सेवा व सूचना सेवाओं को केंद्रीय सेवा कहा जाता है। इन सेवाओं की भर्ती एव प्रशिक्षण का कार्यक्रम संघ सरकार करती ह जबकि अखिल भारतीय सेवा संघ तथा राज्य दोनों स्थानों पर अपनी सेवाएँ देती हैं। इनके सेवाओं के अधिकारियों के कार्य मुख्यत: लिखित से ज्यादा अलिखित है, जिसमें सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन, कानूनी प्रशासन इत्यादि हैं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा: यह सभी अखिल भारतीय सेवाओं में सर्वोच्च स्थान रखती है। तकरीबन १००० रिक्तियों के लिये चयनित अभ्यर्थी आई०ए०एस० अधिकारी जो कि केन्द्रों एवं राज्यों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते है। नियुक्ति के पश्चात इन्हें अनुमंडल या जिलों में नियुक्त किया जाता है और पदोन्नति के चलते ये राज्यों में विभागीय सचिव व केन्द्रों में कैबिनेट सचिव तक के पदों पर कार्य करते है।
 नोट: कैबिनेट सचिव सम्पूर्ण भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे वरिष्ट अधिकारी होता है।

भारतीय पुलिस सेवा: यह सेवा अखिल भारतीय सेवाओं के अन्तर्गत आती है। चयनित अभ्यार्थियों की नियुक्ति तथा ज़िला पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में दो वर्ष की ट्रेनिंग के पश्चात उन्हें सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया जाता है। पदोन्नति क्रमानुसार:- पुलिस अधीक्षक, वरिष्ट पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक तथा महानिदेशक होते हैं। इस सेवा के आई०पी०एस० अधिकारी ही ख़ुफ़िया ब्यूरो,  अनुसंधान एव विशलेषण संस्थान, केंद्रीय जाँच ब्यूरो, एवं अपराध अनुसंधान विभाग में भी अपनी सेवाएँ दे सकते हैं।
भारतीय वन सेवा: इस सेवा का सृजन 1966 में देश की प्राक्रतिक वन संप्रदा के संवर्धन व संरक्षण हेतु किया गया था। चयनित अभ्यार्थी सहायक वन संरक्षण के पद पर कार्य करते है तथा लगभक चार वर्ष कार्यकाल के पश्चात अधिकारियो को वरिष्ट पद और वेतनमान दिया जाता है। वन महानिदेशक केंद्र में सर्वोच्च पद होता है।
भारतीय राजस्व सेवा: यह एक केंद्रीय सेवा है, जहां पर अधिकारियों को वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करना होता है। इस सेवा की दो शाखाएँ हैं - सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क तथा आयकर। इस सेवा में कार्यरत अधिकारी सहायक आयुक्त के पद से शुरुआत  करते हैं, और बाद में मुख्य  आयुक्त के पद पर कार्य करते हैं।
विशिष्ट श्रेणी रेलवे प्रशिक्षु सेवा: इस सेवा का आयोजन अंग्रेजों ने 1927 में शुरू किया गया था। यू०पी०एस०सी० प्रत्येक वर्ष सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से इस सेवा में चयनित अभ्यार्थियों को ग्रुप (ए) के पदों पर नियुक्त करता है, सामन्यत: एस०सी०आर०ए० के माध्यम से भी इसमें कई उच्च पदों की नियुक्ति की जाती है, किन्तु अभ्यार्थियों को ग्रुप (बी) से अपनी सेवा की शुरुआत करनी होती है। अभियांत्रकी सेवा के माध्यम से भी यू०पी०एस०सी० रेलवे सेवा में नियुक्तियां करता हैं।

सिविल सेवा परीक्षा


परिचय: प्रतिवर्ष यू०पी०एस०सी० सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन तीन चरणों में करता है - सर्वप्रथम प्रारम्भिक परीक्षा फिर मुख्य परीक्षा तथा अंतिम चरण में अभ्यार्थी का साक्षात्कार / व्यक्तित्व परीक्षण होता है। साक्षात्कार में चयनित अभ्यार्थी अपने अर्जित किये गये अंकों व वरीयता के अनुरूप आई०ए०एस०, आई०पी०एस०, आई०एफ०एस० तथा अन्य केन्द्रीय सेवाओं (ग्रुप ए व ग्रुप बी) के लिए चयनित किये जाते हैं। देश की इस सबसे मुश्किल परीक्षा और इसमें अचूक सफलता के लिए अनुशासन, कठिन परिश्रम, अध्य्यन प्रबंधन और धैर्य ही मूलभूत अधार हैं।

प्रथम चरण: प्रारंभिक परीक्षा


प्ररंभिक परीक्षा सिविल सेवा परीक्षा का पहला व एक महत्वपूर्ण चरण है। इस परीक्षा में प्रत्येक वर्ष तकरीबन चार लाख से अधिक अभ्यार्थी भाग लेते हैं, किन्तु कुल १३ से १४ हजार अभ्यार्थी ही मुख्य परीक्षा के लिए अर्हता प्राप्त कर पाते हैं। 
यह परीक्षा वस्तुनिष्ठ होती है, जिसमें दो पेपर हुआ करते हैं।
  • प्रथम प्रश्न पत्र : प्रश्न = 100, कुल अंक = 200, समय = 2 घंटे। (सामान्य अध्ययन - राजनीति विज्ञान, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, सामयिक घटनायें इत्यादि।)
  • द्वितीय प्रश्न पत्र : प्रश्न = 80, कुल अंक = 200, समय = 2 घंटे। (तार्किक क्षमता एवं योग्यता इत्यादि।)
नोटप्रत्येक  प्रश्न के लिए दो अंक निर्धारित हैं। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए कुल अंक में से 1/3 अंक काटे जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यार्थियों के अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जुडते हैं।

दूसरा चरण: ुख्य परीक्षा


ुख्य परीक्षा: सिविल सेवा परीक्षा का यह दूसरा चरण अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है, और यहीं पर प्रतिभागियों के ज्ञान की वास्तविक परीक्षा होती है । इसमें परीक्षा में कुल 9 (नौ) प्रश्न पत्र होते हैं । वर्ष 2013 में यू०पी०एस०सी० ने मुख्य परीक्षा प्रकृति में कुछ परिवर्तन किये । पूर्व में होने वाले सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र जो कि 600 अंकों का होता था, वह अब 1000 अंकों का होता है। पहले वैकल्पिक विषयों में से किन्हीं दो का चुनाव करना होता था, जो कि कुल 1200 अंकों के होते थे, किन्तु वर्तमान में अभ्यार्थियों को सिर्फ एक ही वैकल्पिक विषय चुना जाना है जो कि कुल 500 अंकों का होता है।

विषयवार अंकतालिका
विषय / प्रश्नपत्रअंक
निबंध250
सामान्य अध्ययन-1, (भारतीय विरासत एवं संस्कृति, भूगोल, अन्य)250
सामान्य अध्ययन-2-1 शासन, संविधान, सामाजिक न्याय, अन्य250
सामान्य अध्ययन-3- प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-प्रौद्योगिकी, अन्य250
सामान्य अध्ययन-4- नैतिकता, अभिरूचि, योग्यता250
वैकल्पिक विषय- पत्र - 1250
वैकल्पिक विषय- पत्र - 2250
कुल योग: -
1750
नोट:- मुख्य परीक्षा में सफल हुये अभ्यर्थियों को ही यू०पी०एस०सी० सिविल सेवा परीक्षा के तीसरे और अंतिम चरण जो की एक साक्षात्कार परीक्षा है, के लिये बुलाया जाता है।

अंतिम चरण: सिविल सेवा साक्षात्कार


साक्षात्कार में आपके ज्ञान से अधिक, उसकी प्रस्तुति, अवलोकन, आपका आत्मविश्वास एवं महत्वपूर्ण मामलो पर आपके विचार प्रक्रिया व प्रतिक्रिया इत्यादि की परख की जाती है। एक अदर्श साक्षात्कार के लिये लगभक तीस से पैंतीस मिनट तक का समय अच्छा माना जाता है । इसमें प्राय: अभ्यर्थियों के विस्तृत आवेदन प्रपत्र, चयनित एच्छिक विषय, अभिरूचियों व राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय घटनाओं से संबंधित प्रश्न पूंछे जाते हैं।
ज्ञात रहे कि 2013 से मुख्य परीक्षा की पद्धति एवं पाठ्यक्रम के अतिरिक्त साक्षात्कार परीक्षा के अंकों में भी बदलाव किया गया है । पूर्व में साक्षात्कार के लिये 300 अंक निर्धारित थे, किन्तु वर्तमान में यह घटकर 275 अंकों का हो गया है।



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